"देश धर्म का नाता है - गाय हमारी माता है।"
मां तो एक ही होती है या राज्यों और वोटों के हिसाब से बदलती है?
कुछ राज्यों में गौमांस पर पूर्ण प्रतिबंध का वादा कर वोट मांगे जाते हैं।
कुछ राज्यों में गौमांस सस्ता और सुलभ करने के वादे के साथ वोट मांगे जाते हैं।
यह वैध और अवैध स्लोटर हाउस क्या होते हैं? कट तो दोनों ही जगह गौवंश ही रहा है। बंद करो सबको।
कभी देखा इन गौरक्षकों - गौ सैवकों, बड़े नेताओं और लेखकों को बड़े स्लाटर हाउस को बंद कराने और गौवंश के मांस का निर्यात बंद करने के लिये आंदोलन करते और आवाज़ उठाते हुऐ ? संसद में विरोध करते हुऐ?
अब तो अतिवादी हिन्दू संगठनों के नेता और कार्यकर्ता ही गौवंश को क़साईयों के हवाले करने लेजाते हुऐ पकड़े जारहे हैं।
बड़ी मज़ेदार तस्वीर है, भूखी गायें भाजपा का ही चूनावी पोस्टर खा रही हैं। आज के ही अख़बार में प्रकाशित हुई है।
पूरे हिन्दुस्तान में एक वक़्त में ऐसी हज़ारो जगह मिल जायेंगी, जहां भूखी गायें काग़ज़, पन्नी, सड़े गंदे कपड़े, फल, सब्ज़ी यहां तक कि गंदगी खाती मिल जायेंगी।
सब्ज़ी, फल, किराना सामान के दुकानदार भूखी गायों लोहे लगे डंडे से घायल कर भगाते नज़र आ जायेंगे।
हज़ारो आवारा गायों का झुण्ड मौसम की मार झेलता बीच सड़क पर बैठकर दुर्घटना का कारण बनता नज़र आ जायेगा।
सैंकड़ों बीमार और घायल गायें सड़क पर तड़प तड़प कर मरती नज़र आ जायेंगी।
तब कहां चली जाती इन लोगों आस्था और भावना? तब उसका उपहास नहीं उड़ता।
यह ढ़कोसले बाज़ी नहीं तो क्या है?
देखिये, सोचिऐ और समझिये, इन ढकोसले बाज़ बगुला भगतों के दोहरे मापदंडों और चरित्र को। होशियार हो जाईये।
देश में अमन और भाईचारा बनाये रखिये।
सैयद शहनशाह हैदर आब्दी
समाजवादी चिंतक - झांसी।

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