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18 से 22 दिसम्बर तक होगा बिठूर महोत्सव तैय्यारी जोरो पर "विजय विश्वास पन्त"

18 से 22  दिसम्बर तक होगा बिठूर महोत्सव तैय्यारी जोरो पर "विजय विश्वास पन्त"  कानपुर से मधुकर मोघे की रिपोर्ट सूर्या न्यूज एवं समाचार पत्र के लिए  कानपुर। ऐतिहासिक व धार्मिक नगरी बिठूर में 18 दिसंबर से महोत्सव का आयोजन होगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़, झारखंड समेत कई प्रांतों के कलाकार लोकनृत्य व कलाओं की प्रस्तुति करेंगे। नृत्य व गीतों के माध्यम से वे विभिन्न प्रांतों की संस्कृति से परिचित कराएंगे। महोत्सव 22 दिसंबर तक चलेगा । नानाराव पेशवा स्मारक पार्क में आयोजित होने वाले महोत्सव की तैय्यारियां शुरू हो गई हैं।बिठूर में होने वाले महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम, हस्तशिल्प प्रदर्शनी, आजादी पर आधारित प्रदर्शनी, विकास प्रदर्शनी के साथ कबीर और रानी लक्ष्मीबाई पर आधारित नाट्य मंचन किया जाएगा। महोत्सव आयोजनों के लिए सीडीओ अक्षय त्रिपाठी, एडीएम फाइनेंस संजय चौहान, एडीएम एल केहरी सिंह, नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा और एसपी ट्रैफिक की अध्यक्षता में उपसमितियां गठित की गई हैं। जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत ने बताया कि महोत्सव के आयोजन के लिए तारीख लगभग तय हो गई है। --------------...

शेरे मैसूर मर्दे मुजाहिद - टीपू सुल्तान।

शेरे मैसूर मर्दे मुजाहिद - टीपू सुल्तान। टीपू सुल्तान की पैदाइश 20 नवम्बर 1750 को कर्नाटक के देवनाहल्ली (यूसुफ़ाबाद) (बंगलौर से लगभग 33 (21 मील) किमी उत्तर मे) हुआ था। उनका पूरा नाम सुल्तान फतेह अली खान शाहाब था। उनके वालिद का नाम हैदर अली और वालिदा का नाम फ़क़रुन्निसा था। उनके वालिद हैदर अली मैसूर हुकूमत के सिपहसालार थे जो अपनी ताक़त से 1761 में मैसूर साम्राज्य के बादशाह बने। टीपू को मैसूर के शेर के रूप में जाना जाता है। योग्य शासक के अलावा टीपू एक विद्वान, कुशल़ और योग्य सेनापति और शायर भी थे। 18 वीं शताब्दी के अन्तिम चरण में हैदर अली का इंतक़ाल पुरमलाल एवं टीपू सुल्तान का राज्यरोहन मैसूर कि एक प्रमुख घटना है । टीपू सुल्तान के आगमन के साथ ही अंग्रेज़ों कि साम्राज्यवादी नीति पर ज़बरदस्त आधात पहुँचा जहाँ एक ओर कम्पनी सरकार अपने नवजात ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के लिए प्रयत्नशील थी तो दूसरी ओर टीपू अपनी वीरता एवं कुटनीतिज्ञता के बल पर मैसूर कि सुरक्षा के लिए दृढ़ प्रतिज्ञा किये हुऐ थे। वस्तुत:18 वी शताब्दी के उत्तरार्ध में टीपू एक ऐसे महान शासक थे जिन्होंने अंग्रेज़ों को हिन्दुस्त...

हिन्दू कोई धर्म नही जीवनशैली हैं।

हिन्दू कोई धर्म नही! जीवनशैली हैं। : हृदय नारायण दिक्षित भारतीय संस्कृति मे संपूर्ण विश्व की सभ्यताएं समाहित हैं, हिन्दू कोई धर्म नही बल्कि एक जीवनशैली है ।ये बात विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कही । गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष मोहान विधानसभा क्षेत्र के हसनगंज के शुभम रेस्टोरेंट मे  आयोजित भारतीय संस्कृति मे हिन्दू तत्व विषयक गोष्ठी मे बोल रहे थे  उन्होंने आगे कहा कि हिन्दू धर्म की किसी अन्य धर्म से तुलना नही की जा सकती ।          इस  अवसर भारतीय जनता पार्टी के मंडल प्रभारी राकेश कृष्ण साहू ने विधानसभा अध्यक्ष को हिन्दू धर्म की पवित्र पुस्तक गीता भेंट की । कार्यक्रम मे पूर्व एम एल सी विंध्यवासिनी कुमार, जिला  अध्यक्ष श्री कान्त कटियार , जिला उपाध्यक्ष संजय शुक्ला , मोहान विधायक बृजेश रावत, गणेश मिश्रा, सरोज सिंह चौहान, नूतन सिंह, मंडल अध्यक्ष विनोद सिंह, ग्राम प्रधान प्रमोद रस्तोगी,  अरुण दीक्षित, सर्वेश रावत, प्रवीण रावत,  आशीष बाजपेई, शिव प्रकाश शर्मा , गायत्री परिवार के मुकेश गुप्ता सहित बङी संख्या मे लोग मौजूद ...

सिखों के पाँचवे गुरु का बलिदान दिवस मनाया गया

रिपोर्ट-,मिंटू सिंह सिखों के पाँचवे गुरु का बलिदान   दिवस मनाया गया                                               उन्नाव।      गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा व गुरु गोबिंद सिंह स्टडी सर्किल के संयुक्त तत्वाधान में शहीदों के सरताज पांचवें गुरु, गुरु अर्जुन देव  का बलिदान दिवस हाकिम टोला स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सभा,उन्नाव में बड़ी ही श्रद्धा के साथ मनाया गया |    प्रात: काल से ही गुरुद्वारा साहिब के बाहर छबील लगाने के साथ-साथ गुरु ग्रन्थ साहिब का पाठ, शबदकीर्तन व कथा विचार के द्वारा गुरु जी के चरित्र व आदर्शों पर प्रकाश डाला गया । कथावाचक ज्ञानी अमर सिंह ने गुरु  की सत्य के प्रति निष्ठा व जीवन मूल्यों को उपस्थित संगत के समक्ष प्रस्तुत किया । हजूरी रागी भाई महिंदर सिंह ने " तेरा किया मीठा लागे,हरिनाम पदारथ नानक मांगे" व "जपयो जिन अर्जुन देव गुरु, फिर संकट जोन गरभ न आयो" शबद गायन कर सं...

मीडिया की पहली शुरुआत ।

अंकिता पाल  पत्रकारिता जनसंचार विभाग (कानपुर विश्वविद्यालय) मीडिया की पहली शुरुआत ।   कानपुर                               रेडियो डॉक्यूमेंट्री रेडियो एक ऐसा माद्यम है जो वाइल्ड कार्ड से आया जिसमे न जाने कितने कार्यक्रम जिसमें हवा महल चुटकुले अन्य कार्यकम आते है टेलीविजन क़े आने के कारण लोगो ने रेडियो सुनना बन्द कर दिया और रेडियो की महत्वता कम होने लगी फिर रेडियो वाइल्ड कार्ड से एन्ट्री की और युवाओ के दिलो मे अपनी जगह बना और बुजुर्गों क़े दिलो अपनी इज़्ज़त बच्चों के मनोरंजन व कार्यक्रम व टेलिफोनिक प्रोग्राम रखे जिसमें बच्चों युवाओ बड़ो ने चढ़ बड़ कर हिस्सा लिया और तो और रेडियो ने बोल चल की भाषा का प्रयोग किया चाहें   शहरी ग्रामिड झेत्रीय भारतीय भाषाओ  का प्रयोग किया।                     मैं अगर मोबाइल की बात करूं तो मोबाइल फ़ोन युवाओ का एक क्रेज है जो बैंड पर आधारित है वैसे ही हमारे टेलीविजन के बैंड होते है हाई लौ मीडियम बैंड अगर आपके घर...

*इतिहास के छूटे पन्ने!*

*इतिहास के छूटे पन्ने!* उन्नाव: डीह जिसका अर्थ होता है उजड़ा हुआ टीला या वह स्थान जंहा देवताओं की पूजा की जाए। डीह ग्राम सभा जो कि जनपद उन्नाव के ब्लॉक बिछिया की जानी-मानी ग्रामसभा है। जो रायबरेली इलाहाबाद राजमार्ग से सिर्फ 1किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गांव के कुछ बुजुर्गो से बात करने पर पता चला कि लगभग 1200 वी शदी कि मध्यकालीन बस्ती गढ़ी (किला) सदन कसाई का था । डीह से कुछ मीटर की दूरी पर दूल्हा गढ़(वर्तमान में उजड़ा) है जँहा के लोगो ने नवाबों से नवाबगंज तक लड़ाई लड़ी थी। *खुदाई से प्राप्त अवशेष* डीह टीले की खुदाई करने पर लगभग तीस फिट की गहराई पर किले की दीवारें मिली थी जिसकी ईंटे 22"लंबी और 12"चौड़ी थी। कुछ मिट्टी के बर्तन मीलें थे । 50 फिट गहराई पर एक कुआँ मिला था कुछ मूर्तियां मिली थी। जिनमे से एक मूर्ति आठवीं सदी की अदित्यनारायन जी की और एक मूर्ति भैरव जी की मानव आकृति में आज भी डाकघर के बगल में एक मंदिर में स्थापित है। जनश्रुति के आधार पर - डीह किले से  उन्नाव तक  गुप्त आवागमन का मार्ग था। रास्ते मे एक हथगड़ा नाम का टीला है ।23 जुलाई 1941 को  सं...