विधायक हराते-हराते, सरकार ही गवां दी (हेमेन्द्र क्षीरसगर, पत्रकार, लेखक व विचारक) उन्हें नजरअंदाज ना करों जो तुम्हारी बहुत परवहा करते है, वरना एक दिन पत्थर चुनते-चुनते हीरा गवा दोगें। ये कहावत तब चरितार्थ हुई जब मध्यप्रदेश में विधान सभा चुनाव के परिणाम सामने आए। यहां विधायक हराते-हराते लोगों नेे अपनी सरकार ही गवां दी। वह सरकार हरा दी जिसे बनाये रखना चाहती थी। पर करे कोई और भरे कोई के चक्कर में अपने चेहते शिवराज सिंह चौहान को ही खो दिया। और अब पछताये क्यां जब चिडिय़ा चुक गई खेत। देना था वनवास विधायक को और दे दिये मुख्यमंत्री को। उस मुख्यमंत्री को जिसने पैदा लेने से लेकर मरने तक योजना बनाकर सदा जन कल्याण ही किया। आखिर ! इनसे क्यां खता हुई जो सजा इनको मिली। आज भी प्रदेश की जनता यह मानने को तैयार नहीं हो रही है कि मामा हमारे मुख्यमंत्री नहीं रहे। यह इनके लिए सब्जबाग की तरह लग रहा है लेकिन सच तो सच है इसे मानना ही पड़ेगा कि शिवराज पक्ष में नहीं अपितु विपक्ष में रहकर काम ...