पर्यावरण की बलि देकर औद्योगिक विकास।
(सूरज कुमार लेखक व समाजसेवी)
मानव जाति ने आज तक जितनी उन्नति की है उसका श्रेय मनुष्य की बुद्धि को ही जाता है। और यह बुध्दि मानव जाति के लिए ईश्वर का वरदान है। आज औद्योगिक विकास को बढ़ाने की होड़ में हम इतना आगे निकल आये कि पर्यावरण की बलि कब चढ़ गई ? पता ही नही चला। पर्यावरण प्रदूषण आज विभिन्न खतरों के रूप में हमारे सामने विकराल रूप में खड़ा है। जल, वायु तथा मृदा पर्यावरण के प्रमुख तत्व है, लेकिन आज सभी दूषित हो चुके है। *हवा,पानी तथा मिट्टी में दिन - रात धुलते जा रहे प्रदूषण के जहर ने आज विश्व को उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ आगे तबाही के सिवा कुछ नही है।*
अगर अब भी समाज पर्यावरण के मुद्दे को गंभीरता से नही लेते है तो वो दिन दूर नही जब पृथ्वी पर सिर्फ तबाही होगी। न ही शुद्ध जल मुनासिब होगा ,और न ही शुद्ध वायु। अन्न के विषय मे तो सोच भी नही सकते क्या स्थिति होगी? इस लिए सभी से अपील है कि वह पर्यावरण के लिए कुछ समय जरूर दें। जिससे हम अपनी आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण दे सकें।
सूरज कुमार ( डीह, डीह उन्नाव)



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