मशहूर शायर सैo हसन अख्तर रिजवी पर विशेष।
नगर पंचायत न्योतनी जिला उन्नाव के मशहूर शायर सैo हसन अख्तर रिजवी एक खास शाखसियत व विभिन्न विशेषताओ के मालिक थे सदा न्योतनवी शायर और एस एच अख्तर न्योतन्वी का सम्बन्ध कस्बा न्योतनी से था वह पाबंदे शरीयत सादा और परहेजगार थे अत्यन्त नेक मुखलिस और इबादत गुजार थे उनका शुमार कस्बे की चन्द काबिल शाखसियतो में होता था वह न्योतनी के जमीदार और मुआजिज खानदान से तालुक रखते थे इसके अलावा बस्ती जिले में भी उनकी पुश्तैनी करोडो की सम्पत्ति मौजूद है उनके दादा स्व.सैoमुजतबा हुसैन रिजवी बस्ती के चोटी के बडे वक़ील थे उन्होने पत्नी के अलावा दो बेटे छोड़े है ज्ञान के शैदाई होने की मिसाल यह है कि सेवानिव्रत होने से दो वर्ष पहले ही बनारस यूनिवर्सिटी से एम ए उर्दु में पुरा किया एक जमाने से वह शमशुल ओलेमा मौलवी मोहम्मद अब्दुल जलील उस्मानी मेमोरियल सोसाइटी न्योतनी उन्नाव के जनरल सेक्रेटरी की हैसियत से समाजसेवा करते रहे वह शिया सुन्नी के अग्रता थे वह न्योतनी उन्नाव और लखनऊ में बराबर शिया सुन्नी एकता को लेकर जलसे आयोजित किया करते थे जिसमें शिया वकताओ में अतिरिकत सुन्नी बुद्वजीवियो में डाक्टर जफर अहमद खा मलिहाबादी डाक्टर जफर उमर किदवाई गुबार मलिहाबादी के नाम से जाने जाते थे विशेष तौर पर रमजानुल मुबारक में बड़े पैमाने पर बिला तफरीक मजहब ओ मिल्लत अफतार पाटी करते थे अफतार में शिया सुन्नी एक साथ नमाज जमाअत होती थी और सैकडो की संख्या में सब मिलकर नमाज अदा करते थे वह समाज सेवा के लिए भी जाने जाते थे अपने कस्बे की तरक्की लिए जनता की मूलभूत सुविधाओ के निदान के लिए हर समय प्रयास किया करते थे यह अच्छी कोशिश भी कही जा सकती है और इस्लामी उसूल के खिलाफ थे शादी ब्याह में लोग खड़े खड़े खाना खाते है उसके वह सख्त खिलाफ थे और कई बार समाचार पत्रों में लेख भी छपवाए गाँव में हिन्दू मुसलिम शिया सुन्नी झगडो को एक ही बैठक में हल कर देते थे नाप तौल विभाग में अधिकारी की हैसियत से रहते हुए उन्होने कभी भी सरकारी गाड़ी का प्रयोग नहीं किया और नौकरी की पुरी मुददत ईमानदारी व जिम्मेदारी के साथ पूरी की वह एक मजबूत लेखक पत्रकार समाजसेवी कवि शायर थे उनके लेख विभिन्नगुणों और मुददो पर बराबर समाचार पत्रों में छपते रहते थे विशेषता यह थी की उनके समस्त लेख आज भी उनकी छोटी सी लाईब्रेरी न्योतनी में मौजूद है दीनी मुददो पर बहुत ही जोर रहता था वह सैय्यदुश शोहदा इमाम हुसैन और हजरत अली की शान मे तमाम सलाम कता मरसिया कहा करते थे और मोहराम के दीनो में मरसिया बहुत ही आन बान शान के साथ पढते थे इसके अतिरिक्त इतेहाद ए बैनल मुसलिमीन के लिए वह न्योतनी में अकसर सभाएं व कवि सम्मलेन भी कराया करते थे जिसमें बिना किसी धार्मिक भेदभाव के लोग बडी संख्या में लोग शामिल होते थे अतराष्टीय हालात को देखते हुए अमन ए आलम के लिए हमेशा चिन्तित रहते थे साथ ही इंसानियत के विरूध अत्याचार उनका खास मुददा था वह अन्तराष्टीय आतंकवाद के घोर विरोधी थे आप का अपना सैo गुलज़ार अख्तर रिज़वी पेशकश करता न्योतनी उन्नाव .

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