एशियाई खेलों में भारत का स्वर्णिम सफर
जकार्ता एशियाई खेलों में भारत के खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी भारतीयों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। एशियाई खेलों में भारत के खिलाड़ियों ने करीब 67 वर्षो के बाद अपने दमदार प्रदर्शन के चलते विश्व स्तर पर भारत का परचम लहराया है। जिनमे देश की बेटियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है , जो अपनी मेहनत , लगन , इच्छाशक्ति, के मजबूत इरादों के चलते पदक जीतकर नया कीर्तिमान रचा है। इसके बाद उन लोगो की बोलती बंद हो जाएंगी सिर्फ क्रिकेट के खेल को ही सर्वाधिक महत्व देते है। और महिलाओ के प्रतियोगिताओ में भाग लेने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते है। इस बार जकार्ता एशियाई खेलों में पहली बार शामिल किए ब्रिज (ताश के पत्ते का खेल ) में स्वर्ण जीतकर भारत के 60 वर्षीय प्रणव वर्धन और शिवनाथ ठाकुर ने इतिहास रच दिया है। जकार्ता एशियाई खेलों में जिन खिलाड़ियों ने भारत के लिए पदक जीते है वो ऐसे परिवार से आए है जिन्हें पूर्ण सुविधाएं नही मिली और वे अपनी इच्छाशक्ति और मेहनत के बलबूते पदक जीतने में सफलता प्राप्त की है। अब देश की सरकार को चाहिए कि इन खिलाड़ियों के मौजूद इरादों को आगे भी बुलंद करने के लिए सरकार को ध्यान देने और सुविधाये देने के साथ ही आर्थिक मदद भी दी जाए ताकि आगे भी ये खिलाड़ी देश का नाम रोशन करते रहे।
योगेन्द्र गौतम

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